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Official TranscriptWAMN-374/2026/ 029/22-2-2026-7(590)/2026 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ,दिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 विषय:- जिला कारागार, गौतमबुद्धनगर में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी नेमपाल पुत्र श्री अमीचन्द, निवासी जनपद- बुलन्दशहर की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व...
WAMN-374/2026/ 029/22-2-2026-7(590)/2026 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ,दिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 विषय:- जिला कारागार, गौतमबुद्धनगर में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी नेमपाल पुत्र श्री अमीचन्द, निवासी जनपद- बुलन्दशहर की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्बन्ध में। महोदय, उपर्युक्त विषयक उप महानिरीक्षक(मु0), कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उ0प्र0, लखनऊ के पत्र संख्या-20825/प्रो ०अनु ०(7)-फार्म-ए सीमित ARTA (5/2026(stofeo-20.04.2026) दिनांक-26.05.2026 का कृपया संदर्भ ग्रहण करें। 2- उक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार जिला कारागार, गौतमबुद्धनगर में freq सिद्धदोष sect नेमपाल पुत्र श्री अमीचन्द, जो ग्राम-मूढी बकापुर, थाना-औरंगाबाद, जनपद-बुलन्दशहर का निवासी है। feeeh-2.0.20i8 को अभियुक्त द्वारा वादी मुकदमा की 0 avfa पुत्री को बहला फुसलाकर नहर किनारे झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती बलात्कार करने का अपराध कारित किया गया। उक्त अपराध हेतु बन्दी को एस०ण्टी० 0-3(9/209, भा०्द०वि० की धारा-363, 376 एबी, आईग्पी०्सी० A मा० न्यायालय विशेष न्यायाधीश पाक्सो vee बुलन्दशहर के आदेश दिनांक-09.08.2024 द्वारा 20 वर्ष के कारावास से दण्डित किया गया। बन्दी द्वारा दिनांक 37.40.2025 तक अपरिहार 07 वर्ष, 00 माह, 0 दिन तथा सपरिहार 07 वर्ष, 04 माह, 03 दिन की सजा भोगी गयी है। 3- जिला प्रोवेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर FANT शासनादेश संख्या (658/22-02-2004-25 (94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण ARAL बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 क्रि०एलण्जे० (47 में Alo उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। उक्त आख्या में बन्दी द्वारा कारित अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित किये बिना व्यक्ति विशेष तक सीमित अपराध की श्रेणी में नही आने, बंदी द्वारा भविष्य में अपराध करने का अवसर होने, बन्दी द्वारा पुनः अपराध करने में अशक्त नहीं होने, बन्दी को जेल में निरूद्ध रखने का सार्थक प्रयोजन होने, कीआख्या अंकित करते हुए समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है। 4- प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में feeH-27.0.20i8 को अभियुक्त द्वारा वादी मुकदमा की 0 वर्षीय पुत्री को बहला फुसलाकर नहर किनारे झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती बलात्कार करने का अपराध कारित किया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, द्वारा सम्यक् परीक्षण कर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या A समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिलक्षित नही है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट की आख्या / संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन एक्ट 938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष नेमपाल पुत्र श्री अमीचन्द को फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |5- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ है कि जिला कारागार, गौतमबुद्धनगर A freq सिद्धदोष बन्दी नेमपाल (बन्दी संख्या-882/2024) पुत्र श्री अमीचन्द, निवासी जनपद-बुलन्दशहर को यू०“पी० प्रिजनर्स रिलीज आंन प्रोबेशन एक्ट, 938 की धारा-2 के प्राविधानों के अन्तर्गत फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। अतएव उक्त बन््दी की फार्म- ए/लाइसेंस पर मुक्ति सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा अस्वीकार कर दी गयी है। तदनुसार उसके फार्म-ए पर शासन के आदेश अंकित करके एतददवारा वापस clea जा रहा है। कृपया प्राप्ति स्वीकार करते हुए शासन के निर्णय से बन्दी को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें। संलग्नक: यथोपरि। (बन्दी का फार्म-ए एवं समस्त पत्रादि सहित) भवदीय, कमलेश कुमार उप सचिव। UEA-374/2026/029(4)/22-2-2026 तददिनांक...
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:- I- जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर। 2- अधीक्षक, जिला कारागार, गौतमबुदधनगर। 3- निजी सचिव,मा0 मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 को AIO मंत्री जी के सूचनार्थ। 4- निजी सचिव, AIO राज्य मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 को AO Aa जी के सूचनार्थ। 5- गार्ड फाईल। आज्ञा से, अभय कुमार त्रिपाठी अनु सचिव। l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |शासनादेश BAT-374/2026/029/22-2-2026-7(590)/2026 दिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 का संलग्नक सरकार के आदेश जिला कारागार, गौतमबुद्धनगर में निरूद्थ सिद्धदोष sect नेमपाल् पुत्र श्री अमीचन्द, जो ग्राम-मूढी बकापुर, थाना-औरंगाबाद, जनपद-बुलन्दशहर का निवासी है। feeth-24.0.20i8 को अभियुक्त द्वारा वादी मुकदमा की i0 वर्षीय पुत्री को बहला फुसलाकर नहर किनारे झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती बलात्कार करने का अपराध कारित किया गया। उक्त अपराध हेतु बन्दी को एसण्टी० नं0-39/209, भा०द०वि० की धारा-363, 376 एबी, आई०पी०्सी० में Alo न्यायालय विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट बुलन्दशहर के आदेश दिनांक-09.08.2024 cant 20 वर्ष के कारावास से दण्डित किया गया। acct द्वारा दिनांक
34.0.2025 तक अपरिहार 07 वर्ष, 00 माह, 0 दिन तथा सपरिहार 07 वर्ष, 04 माह, 03 दिन की सजा भोगी गयी है। जिला प्रोवेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर द्वारा शासनादेश संख्या (658/22-02-2004-25 (94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण ARAL बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 क्रि०एलण्जे० (47 में Alo उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। उक्त आख्या में बन्दी द्वारा कारित अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित किये बिना व्यक्ति विशेष तक सीमित अपराध की श्रेणी में नही आने, बंदी द्वारा भविष्य मेँ अपराध करने का अवसर होने, बन्दी द्वारा पुनः अपराध करने में अशक््त नहीं होने, बन्दी को जेल A निरूद्ध रखने का सार्थक प्रयोजन होने, कीआख्या अंकित करते हुए समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है। प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में fecH-27.0.20i8 को अभियुक्त द्वारा वादी मुकदमा की 0 वर्षीय पुत्री को बहला फुसलाकर नहर किनारे झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती बलात्कार करने का अपराध कारित किया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, द्वारा सम्यक् परीक्षण कर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या A समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिलक्षित नही है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट की आख्या / संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। इस प्रकार Feel द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन एक्ट 938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष नेमपाल पुत्र श्री अमीचन्द को फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। उक्त के दष्टिगत सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा बन्दी की फार्म-ए/लाइसेंस केआधार पर समयपूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है। कमलेश कुमार उप सचिव। l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |